भारत में पुनरावृत्त अग्नि दुर्घटनाओं के बीच सुरक्षा शासन का सुदृढ़ीकरण

पाठ्यक्रम: GS2/ शासन, GS3/ आपदा प्रबंधन

संदर्भ

  • हाल की अग्नि त्रासदियों, जिनमें दिल्ली के बी एंड बी (B&B) अग्निकांड तथा मुजफ्फरपुर अस्पताल अग्निकांड शामिल हैं, ने एक बार फिर शहरी भारत में अग्नि सुरक्षा अनुपालन एवं प्रवर्तन से संबंधित स्थायी कमियों को उजागर किया है।

विगत तीन दशकों में भारत की प्रमुख अग्नि दुर्घटनाएँ

  • उपहार सिनेमा अग्निकांड (1997) ने अत्यधिक भीड़, अवरुद्ध निकास मार्गों तथा अपर्याप्त आपातकालीन तैयारी की समस्याओं को उजागर किया।
  • उत्तर गोवा के अर्पोरा नाइटक्लब अग्निकांड (2025) ने सुरक्षा मानकों के उल्लंघन तथा अनुमत क्षमता से अधिक लोगों की उपस्थिति की समस्या को रेखांकित किया।
  • दिल्ली बी एंड बी अग्निकांड (2026) ने अनिवार्य अग्नि स्वीकृति (फायर क्लियरेंस) के बिना तथा स्वीकृत सीमा से कहीं अधिक कमरों के साथ संचालित प्रतिष्ठानों की वास्तविकता को उजागर किया।
  • मुजफ्फरपुर अस्पताल अग्निकांड (2026) ने आपातकालीन परिस्थितियों में विशेष रूप से वृद्ध एवं गंभीर रूप से बीमार मरीजों की संवेदनशीलता को प्रदर्शित किया।

भारत में अग्निशमन सेवाएँ

  • अग्निशमन सेवा एक राज्य विषय है तथा इसे भारतीय संविधान के अनुच्छेद 243(W) के अंतर्गत द्वादश अनुसूची में नगरपालिका कार्य के रूप में शामिल किया गया है।
    • परिणामस्वरूप विभिन्न राज्यों में कानूनी एवं संस्थागत ढाँचे में भिन्नता पाई जाती है।
  • भारतीय मानक ब्यूरो (BIS) द्वारा जारी राष्ट्रीय भवन संहिता (NBC), 2016 अग्नि सुरक्षा संबंधी सबसे व्यापक दस्तावेज है।
    • यह संहिता विशेष रूप से अग्नि एवं जीवन सुरक्षा से संबंधित है तथा भवनों की अभिकल्पना, निर्माण एवं अग्नि सुरक्षा प्रणालियों के लिए विस्तृत तकनीकी दिशा-निर्देश प्रदान करती है।
  • राज्य स्तर पर विभिन्न अग्निशमन सेवा अधिनियम कार्यान्वयन एवं प्रवर्तन को नियंत्रित करते हैं।
    • ये कानून अग्निशमन विभागों को निरीक्षण करने, अनापत्ति प्रमाण-पत्र (NOC) जारी करने तथा उल्लंघनों के विरुद्ध कार्रवाई करने का अधिकार प्रदान करते हैं।
  • राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NDMA) द्वारा क्रियान्वित आपदा प्रबंधन अधिनियम, 2005 अग्नि दुर्घटनाओं को व्यापक आपदा प्रबंधन ढाँचे में समाहित करता है तथा तैयारी एवं प्रतिक्रिया तंत्र को सुदृढ़ बनाता है।
    • कारखाना अधिनियम, 1948, विस्फोटक अधिनियम, 1884 तथा पेट्रोलियम अधिनियम, 1934 जैसे क्षेत्र-विशिष्ट कानून औद्योगिक एवं जोखिमपूर्ण वातावरण में अग्नि सुरक्षा को विनियमित करते हैं।
  • ऊँची इमारतों के लिए अग्नि लिफ्ट, शरण क्षेत्र तथा दाबयुक्त सीढ़ियों जैसी विशेष व्यवस्थाएँ अनिवार्य की गई हैं, जिससे सुरक्षित निकासी एवं अग्निशमन कार्यों को सुगम बनाया जा सके।

संस्थागत ढाँचा

  • केंद्रीय स्तर पर: अग्निशमन सेवाएँ, नागरिक सुरक्षा एवं होम गार्ड्स महानिदेशालय गृह मंत्रालय के अंतर्गत कार्य करता है।
    • यह नीति-निर्माण, प्रशिक्षण तथा अग्निशमन सेवाओं के आधुनिकीकरण के लिए उत्तरदायी है।
  • राज्य स्तर पर: राज्य अग्निशमन विभाग अग्नि सुरक्षा नियमों के कार्यान्वयन, निरीक्षण, प्रमाणन जारी करने तथा आपातकालीन प्रतिक्रिया के लिए उत्तरदायी होते हैं।

अग्नि सुरक्षा प्रमाणन (NOC)

  • अग्नि सुरक्षा अनुपालन सुनिश्चित करने हेतु अग्नि सुरक्षा प्रमाण-पत्र अथवा अनापत्ति प्रमाण-पत्र (NOC) जारी किया जाता है।
    • यह प्रमाणन ऊँची इमारतों, वाणिज्यिक प्रतिष्ठानों, अस्पतालों, विद्यालयों तथा अन्य सार्वजनिक भवनों के लिए अनिवार्य है।
  • इस प्रक्रिया में भवन योजनाओं का प्रस्तुतिकरण, अग्निशमन विभाग द्वारा निरीक्षण, सुरक्षा मानकों के अनुपालन का सत्यापन तथा प्रमाण-पत्र जारी करना शामिल है।
  • निरंतर अनुपालन सुनिश्चित करने हेतु इसका समय-समय पर नवीनीकरण आवश्यक होता है।

पुनरावृत्त अग्नि दुर्घटनाओं के पीछे संरचनात्मक कारण

  • सुरक्षा मानकों के प्रवर्तन की कमजोरी: अपर्याप्त निरीक्षण एवं कमजोर निगरानी के कारण सुरक्षा उल्लंघन वर्षों तक जारी रहते हैं।
  • अनधिकृत संशोधन एवं अत्यधिक भीड़: अनेक प्रतिष्ठान स्वीकृत क्षमता से अधिक लोगों को समायोजित करते हैं।
    • साथ ही, बिना अनुमति के संरचनात्मक परिवर्तन किए जाते हैं, जिससे निकासी एवं अग्निशमन प्रयास प्रभावित होते हैं।
  • नियामकीय खामियाँ एवं नियमों से बचाव: कई व्यवसाय भूमि उपयोग एवं लाइसेंसिंग संबंधी छूटों का लाभ उठाकर सुरक्षा आवश्यकताओं से बचते हैं तथा असुरक्षित संचालन जारी रखते हैं।
  • लागत में कटौती: परिचालन लागत कम करने के उद्देश्य से अग्नि सुरक्षा प्रणालियों एवं अनुपालन उपायों की प्रायः उपेक्षा की जाती है।
  • संस्थागत जवाबदेही का अभाव: प्रवर्तन में विफलता के लिए नियामक एजेंसियों को प्रायः उत्तरदायी नहीं ठहराया जाता, जिससे लापरवाही बनी रहती है।
  • कमजोर सुरक्षा संस्कृति: अग्नि सुरक्षा को प्रायः सार्वजनिक सुरक्षा की अनिवार्यता के बजाय केवल औपचारिक अनुपालन के रूप में देखा जाता है।

भारत की अग्नि सुरक्षा व्यवस्था से संबंधित प्रमुख समस्याएँ

  • खंडित नियामकीय ढाँचा: अग्निशमन सेवाएँ राज्य विषय होने के कारण विभिन्न राज्यों में मानकों एवं प्रवर्तन क्षमताओं में असमानता पाई जाती है।
  • अनुपालन-केंद्रित दृष्टिकोण: वर्तमान व्यवस्था का ध्यान केवल NOC प्राप्त करने पर केंद्रित है, जबकि निरंतर अनुपालन सुनिश्चित करने पर अपेक्षित बल नहीं दिया जाता।
  • क्षमता संबंधी बाधाएँ: अनेक अग्निशमन विभाग कर्मियों, उपकरणों एवं आधुनिक अग्निशमन प्रौद्योगिकियों की कमी का सामना कर रहे हैं।
  • जोखिम-आधारित निरीक्षणों का अभाव: निरीक्षण प्रायः प्रतिक्रियात्मक एवं दुर्घटना-आधारित होते हैं, जबकि निवारक  दृष्टिकोण अपेक्षाकृत कमजोर है।

आगे की राह

  • संघीय ढाँचे का सम्मान करते हुए सामंजस्यपूर्ण राष्ट्रीय अग्नि सुरक्षा मानकों की दिशा में अग्रसर होना चाहिए।
  • प्रौद्योगिकी-सक्षम निगरानी एवं तृतीय-पक्ष लेखा-परीक्षण के माध्यम से निरीक्षण एवं प्रवर्तन तंत्र को सुदृढ़ किया जाना चाहिए।
  • अस्पतालों, होटलों, विद्यालयों, मॉलों एवं अन्य सार्वजनिक भवनों के लिए नियमित अग्नि सुरक्षा ऑडिट और मॉक ड्रिल अनिवार्य किए जाने चाहिए।
  • सुरक्षा उल्लंघनों के लिए भवन स्वामियों तथा नियामक प्राधिकरणों दोनों की जवाबदेही सुनिश्चित की जानी चाहिए।
  • उपकरणों, प्रशिक्षण एवं आपातकालीन प्रतिक्रिया प्रणालियों में अधिक निवेश कर अग्निशमन सेवाओं का आधुनिकीकरण किया जाना चाहिए।
  • नागरिकों, व्यावसायिक प्रतिष्ठानों एवं सार्वजनिक संस्थानों के मध्य अग्नि सुरक्षा जागरूकता की संस्कृति को प्रोत्साहन  दिया जाना चाहिए।

स्रोत: TH

 

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